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Kasturimitra

चूप चुपके ना देखो हमे
फिर हम भी आपको देखने लगते है
इस आदत को छोडते छोडते
फिरसे मोहब्बत कर बैठते है


हमसे बडा आशिक
ये पागल दिल हमारा है
आपके इशारे समझनेवाला
दुनियामे वो अकेला है


अखियोंका क्या हाल सुनाऊँ
हर सपनेमे आपका चेहरा बसा है
रात हो या दिन इन निंदोमे
आपके सपनोंका मेला लगा है


क्या बताऊँ तुम्हे ये जिंदगी
अब बेवफाई हमसे करती है
खुदको देखू आइनेमे तो
तेरा चेहरा दिखाने लगती है
 

अक्सर सुना हमने लोगोंसे
ये इश्क आगका दर्या है
आखिर आया समझ ये
सोना आगसेही तो निकलता है





         प्रणव प्रभू